विनम्र श्रद्धांजलि
Kavi Pankaj Angaar kabirism
चट्टानों सी सख्त थी जिसकी हर इक बात
गुज़र गया संसार से ख़ामोशी के साथ .........
गाया जिसने जाग कर इन रातों का दर्द ......
एक सितारा भी नहीं था उसका हमदर्द .......
लज्जित हो स्वीकारते पंकज हम यह पाप.....
हमने भी बिसरा दिया .उनका हर संताप
ग़ज़लें बौराई फिरें शब्द पड़े बेहोश
मिली दुखद ये सूचना अदम हुए खामोश
विनम्र श्रद्धांजलि
रविवार, 18 दिसंबर 2011
सदस्यता लें
टिप्पणियाँ भेजें (Atom)
दलितों की मुक्ति में संघर्ष की भूमिका पर डॉ. भीमराव रामजी अम्बेडकर के विचार
दलितों की मुक्ति में संघर्ष की भूमिका पर डॉ. भीमराव रामजी अम्बेडकर के विचार एस आर दारापुरी आई.पी.एस.(सेवानिवृत) प्रस्तावना डॉ. भ...
-
भगवान दास : एक स्मृति ( एक संस्मरण , जो उनके परिनिर्वाण के दूसरे दिन लिखा गया था) ( कँवल भारती) ...
-
डॉ. आंबेडकर का आगरा का ऐतिहासिक भाषण (18 मार्च, 1956 ) (नोट:- डॉ. आंबेडकर का यह भाषण ऐतिहासिक और अति महत्वपूर्ण है क्योंकि इस...
-
कांशीराम के अवसरवादी गठबंधनों ने भाजपा–हिंदुत्व को कैसे पुनः सशक्त किया और दलितों को कैसे भ्रमित किया - एस आर दारापुरी, राष्ट्रीय ...
कोई टिप्पणी नहीं:
एक टिप्पणी भेजें