बाढ़ पर अदम की एक कविता
'महज तनख्वाह से निबटेंगे क्या नखरे लुगाई के..
हजारों रास्ते हैं सिन्हा साहब की कमाई के
मिसेज सिन्हा के हाथों में जो बेमौसम खनकते हैं..
पिछली बाढ़ के तोहफे हैं ये कंगन कलाई के।'
बुधवार, 21 दिसंबर 2011
सदस्यता लें
टिप्पणियाँ भेजें (Atom)
डा. सविता अम्बेडकर, बाबासाहेब की दूसरी पत्नी के साथ संस्मरण
डा. सविता अम्बेडकर, बाबासाहेब की दूसरी पत्नी के साथ संस्मरण एस.आर. दारापुरी 1987 में मैं बनारस में पुलिस अधीक्ष...
-
भगवान दास : एक स्मृति ( एक संस्मरण , जो उनके परिनिर्वाण के दूसरे दिन लिखा गया था) ( कँवल भारती) ...
-
डॉ. आंबेडकर का आगरा का ऐतिहासिक भाषण (18 मार्च, 1956 ) (नोट:- डॉ. आंबेडकर का यह भाषण ऐतिहासिक और अति महत्वपूर्ण है क्योंकि इस...
-
कांशीराम के अवसरवादी गठबंधनों ने भाजपा–हिंदुत्व को कैसे पुनः सशक्त किया और दलितों को कैसे भ्रमित किया - एस आर दारापुरी, राष्ट्रीय ...
कोई टिप्पणी नहीं:
एक टिप्पणी भेजें