घर में ठंडे चूल्हे पर अगर खाली पतीली है।
घर में ठंडे चूल्हे पर अगर खाली पतीली है।
बताओ कैसे लिख दूँ धूप फागुन की नशीली है।।
भटकती है हमारे गाँव में गूँगी भिखारन-सी।
सुबह से फरवरी बीमार पत्नी से भी पीली है।।
बग़ावत के कमल खिलते हैं दिल की सूखी दरिया में।
मैं जब भी देखता हूँ आँख बच्चों की पनीली है।।
सुलगते जिस्म की गर्मी का फिर एहसास हो कैसे।
मोहब्बत की कहानी अब जली माचिस की तीली है।।
ADAM GONDVI
रविवार, 18 दिसंबर 2011
सदस्यता लें
टिप्पणियाँ भेजें (Atom)
डॉ. बी. आर. अंबेडकर की कम्यूनिज़्म की आलोचना और कम्युनिस्टों के साथ उनके संबंध
डॉ. बी. आर. अंबेडकर की कम्यूनिज़्म की आलोचना और कम्युनिस्टों के साथ उनके संबंध एस आर दारापुरी आई.पी.एस.(सेवानिवृत) परिचय आधुनिक भ...
-
भगवान दास : एक स्मृति ( एक संस्मरण , जो उनके परिनिर्वाण के दूसरे दिन लिखा गया था) ( कँवल भारती) ...
-
डॉ. आंबेडकर का आगरा का ऐतिहासिक भाषण (18 मार्च, 1956 ) (नोट:- डॉ. आंबेडकर का यह भाषण ऐतिहासिक और अति महत्वपूर्ण है क्योंकि इस...
-
कांशीराम के अवसरवादी गठबंधनों ने भाजपा–हिंदुत्व को कैसे पुनः सशक्त किया और दलितों को कैसे भ्रमित किया - एस आर दारापुरी, राष्ट्रीय ...
कोई टिप्पणी नहीं:
एक टिप्पणी भेजें