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रविवार, 25 अक्टूबर 2026

क्या महाऋषि वाल्मीकि अछूत या शूद्र थे?

क्या महाऋषि वाल्मीकि अछूत या शूद्र थे?

एस आर दारापुरी आई.पी.एस.(सेवानिवृत)

आज वाल्मीकि जयंती है। मेरे विचार में इस मौके पर महाऋषि वाल्मीकि के वारे में सही जानना उचित होगा। आज सफाई कर्मचारी जिन का एक हिस्सा अपने आप को बाल्मीकि / वाल्मीकि कहलाता है वाल्मीकि जयंती जोर शोर से मना रहा होगा। इस मौके पर महाऋषि वाल्मीकि के बाल्मीकि समाज से सम्बन्ध के बारे में जानना उचित होगा। आज बाल्मीकि समाज महाऋषि वाल्मीकि को अपना धर्मगुरु मानता है और बाल्मीकि रामायण को अपनी धार्मिक पुस्तक।

 सब से पहले अगर महाऋषि वाल्मीकि के सम्बन्ध को देखा जाए तो महाऋषि वाल्मीकि न तो अछूत और न ही शूद्र थे बल्कि उसने रामायण में अपना परिचय परचेता के बेटे के रूप में दिया है जोकि वरुण का बेटा था और वह महाऋषि कश्यप का नौवां पुत्र था और ब्राह्मण था। अतः इस में कोई सन्देह नहीं है कि वाल्मीकि भी ब्राह्मण ही थे। दूसरे रामायण में कही भी वाल्मीकि ने अछूतों के पक्ष में कोई भी बात न लिख कर उन आदिवासियों को भालू और वानर के रूप में पेश किया है।  दरअसल बाल्मीकि नाम का चलन पंजाब से शुरू हुआ था  जहाँ पर सफाई आदि का काम करने वालों की चूहड़ा जाति है। दरअसल उस समय पंजाब में इस जाति के लोग बहुत भारी मात्रा में ईसाई हो रहे थे और हरेक जनगणना में हिन्दुओं की आबादी कम हो रही थी। इस बहिर्गमन को रोकने के लिए अमी चंद शर्मा नाम के ब्राह्मण ने बाल्मीकि प्रकाश नामक ग्रन्थ लिख कर यह प्रचारित किया कि महाऋषि वाल्मीकि चूह्डों का धर्म गुरु है और रामायण उनकी धार्मिक पुस्तक और उन्हें अपनी ज़ात चूहड़ा के स्थान पर बाल्मीकि लिखानी चाहिए और अपने नाम के साथ बाल्मीकि लगाना चाहिए। उन्होंने ने बड़ी चालाकी से वाल्मीकि को बाल्मीकियों का आदि पुरुष नहीं कहा क्योंकि तब तो बाल्मीकि ब्राह्मण होने का दावा कर सकते थे। बिहार में ब्राह्मणों  की एक उपजाति अपने आप को वाल्मीकि कहती है।  

 बस तभी से बाल्मीकि जाति का उद्भव हुआ। उस से पहले वे चूहड़ा, लालबेगी आदि नामों से जाने जाते थे। इस सम्बन्ध में श्री भगवान दास जी ने अपनी प्रसिद्ध पुस्तक  "मैं भंगी हूँ" में अछूत जातियों का इतिहास बताते हुए लिखा है कि "दरअसल, पंजाब की चूहड़ा जाति के लोगों में ईसाई धर्म के प्रभाव को रोकने और सफाई का काम करने वालों लोगों को इसी गंदे पेशे में फंसाए रखने के लिए पंजाब के हिन्दू नेताओं ने उन्हें "बाल्मीक" नाम दिया था और इस के प्रचार- प्रसार के लिए वित्तीय सहायता भी दी थी. "चूहड़ा" घृणित नाम था. अतः उन्हें जमादार कहा जाने लगा और जाति "बाल्मीकि" कर दिया परन्तु सच तो यह है की न तो सभी सफाई कर्मचारी बाल्मीकि हैं और न सभी बाल्मीकि सफाई कर्मचारी हैं। सफाई कर्मी कई नामों से जाने जाते हैं."
अतः आज महाऋषि वाल्मीकि जयंती के अवसर पर महाऋषि वाल्मीकि के बारे में उपरोक्त तथ्यों के आलोक में बाल्मीकि जाति से उस के सम्बन्ध और रामायण के उनके धर्म ग्रन्थ के बारे में विचार करना उचित होगा।

 

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