शनिवार, 10 दिसंबर 2011

न काहू से दोस्ती न काहू से वैर!
क्या वाल्मीकि अछूत या शुद्र थे ?
आज वाल्मीकि जयंती है. मेरे विचार में इस मौके पर महारिषी वाल्मीकि के वारे में सही जानना उचित होगा. आज सफाई कर्मचारी जिन का एक हिस्सा अपने आप को बाल्मीकि / वाल्मीकि कहलाता है वाल्मीकि जयंती जोर शोर से मना रहा होगा. इस मौके पर वाल्मीकि के बाल्मीकि समाज से सम्बन्ध के बारे में जानना उचित होगा. आज बाल्मीकि समाज वाल्मीकि को अपना धर्मं गुरु मानता है और बाल्मीकि रामायण को अपनी धार्मिक पुस्तक. सब से पहले अगर वाल्मीकि के सम्बन्ध को देखा जाए तो वाल्मीकि न तो अछूत और न ही शुद्र थे बल्कि उस ने रामायण में अपना परिचय परचेता के बेटे के रूप में दिया है जो कि वरुण का बेटा था और वह महारिषी कश्यप का नवं पुत्तर था और ब्राहमण था. अतः इस में कोई सद्न्देह नहीं है कि वाल्मीकि भी ब्राहमण ही थे . दूसरे रामायण में कही भी वाल्मीकि ने अछूतों के पक्ष में कोई भी बात न लिख कर उन आदिवासियों को भालू और वानर के रूप में पेश किया. दरअसल बाल्मीकि नाम का चलन पंजाब से शुरू हुआ जहाँ पर सफाई आदि का काम करने वालों की चूहड़ा जाति से हुआ. दरअसल उस समय पंजाब में इस जाति के लोग बहुत भरी मात्रा में ईसाई हो रहे थे और हरेक जनगणना में हिन्दुओं की आबादी कम हो रही थी. इस बहिर्गमन को रोकने के लिए अमी चंद शर्मा नाम के ब्रह्मण ने बाल्मीकि प्रकाश नामिक ग्रन्थ लिख कर यह प्रचारित किया कि वाल्मीकि चुह्डों का धर्म गुरु है और रामायण उनकी धार्मिक पुस्तक और उन्हें अपनी ज़ात चूहड़ा के स्थान पर बाल्मीकि लिखानी चाहिए और अपने नाम के साथ बाल्मीकि लगाना चाहिए. बस तभी से बाल्मीकि जाति का उद्भव हुआ उस से पहले वे चूहड़ा , लालबेगी आदि नामों से जाने जाते थे. इस सम्बन्ध में श्री भगवान दास जी ने अपनी परसिद्ध पुस्तक "मैं भंगी हूँ " में अछूत जातियों का इतिहास बताते हुए लिखा है कि " दरअसल, पंजाब की चूहड़ा जाति के लोगों में ईसाई धर्म के प्रभाव को रोकने और सफाई का काम करने वालों लोगों को इसी गंदे पेशे में फंसाए रखने के लिए पंजाब के हिन्दू नेताओं ने उन्हें "बाल्मीक" नाम दिया था और इस के प्रचार- प्रसार के लिए वित्तीय सहयता भी दी थी. "चूहड़ा" घृणित नाम था. अतः उन्हें जमादार कहा जाने लगा और जाति "बाल्मीकि" कर दिया परन्तु सच तो यह है की न तो सभी सफाई कर्मचारी बाल्मीकि हैं और न सभी बाल्मीकि सफाई कर्मचारी हैं. सफाई कर्मी कई नामों से जाने जाते हैं."
अतः आज वाल्मीकि जयंती के अवसर पर वाल्मीकि के बारे में उपरोक्त तथ्यों के आलोक में बाल्मीकि जाति से उस के सम्बन्ध और रामायण के उनके धर्म ग्रन्थ के बारे में विचार करना उचित होगा.

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