सोमवार, 6 मार्च 2017

सोनभद्र के आदिवासी बसपा, सपा,भाजपा और कांग्रेस को वोट क्यों नहीं देंगे?

सोनभद्र के आदिवासी बसपा, सपा,भाजपा और कांग्रेस को वोट क्यों नहीं देंगे?
- एस. आर. दारापुरी, राष्ट्रीय प्रवक्ता , आल इंडिया पीपुल्स फ्रंट
उत्तर प्रदेश के सोनभद्र ज़िले में आदिवासियों की सबसे बड़ी आबादी है। इस चुनाव में हाल में आइपीएफ द्वारा आदिवासियों के लिए आरक्षित कराई गई दो सीटों दुद्धी और ओबरा पर सभी पार्टियों ने उम्मीदवार खड़े किये हैं। आइपीएफ भी ओबरा सीट पर एक आदिवासी मज़दूर को चुनाव लड़ा रही है। इस चुनाव में इन आदिवासी आरक्षित सीटों के क्षेत्र के आदिवासी सपा, बसपा भाजपा और कांग्रेस से सख्त नाराज़ हैं और उन्हें वोट नहीं देंगे क्योंकि:
1. 2008 में जब वनाधिकार कानून लागू हुआ था उस समय उत्तर प्रदेश में मायावती की सरकार थी।इस कानून के अंतर्गत सभी आदिवासियों/वनवासियों को उनके कब्ज़े की ज़मीन का मालिकाना हक उनके अधिकार के रूप मे दिया जाना था। परंतु मायावती सरकार ने आदिवासियों को ज़मीन न देकर सोनभद्र के 65000 परिवारों के दावों में से 53000 दावों को निरस्त कर दिया। इसके साथ ही पूरे उत्तर प्रदेश में आदिवासियों के 81%दावे निरस्त कर दिए गए। क्या आदिवासियों के साथ इससे बड़ा कोई अन्याय हो सकता है?
मायावती सरकार के इस अन्याय के विरुद्ध आइपीएफ ने इलाहाबाद हाई कोर्ट में एक जनहित याचिका दायर करके सभी आदिवासियों के दावे पुनः तैयार कराकर सभी को भूमि आवंटित करने का अनुरोध किया। माननीय उच्च न्यायालय ने इस अनुरोध को स्वीकार कर अगस्त 2013 में सभी आदिवासियों के दावों का पुनर्परीक्षण कर भूमि आवंटित करने का आदेश दिया। तब तक उत्तर प्रदेश में सपा की सरकार आ गयी थी। आइपीएफ बराबर अखिलेश सरकार से हाई कोर्ट के आदेश का अनुपालन करने का अनुरोध करता रहा परंतु उसने इस दिशा में कोई भी कार्रवाही नहीं की। इस तथ्य को सभी आदिवासी बहुत अच्छी तरह से जानते हैं। आइपीएफ ने इसको अपना प्रमुख चुनावी मुद्दा बनाया है।
2. उत्तर प्रदेश में आदिवासियों की आबादी लगभग 12 लाख है परंतु उनके लिए किसी भी स्तर पर स्थानीय निकायों तथा विधान सभा एवं लोकसभा में कोई भी आरक्षण उपलब्ध नहीं था। आइपीएफ इन्हें आरक्षण दिलाने की लड़ाई पिछले 10 सालों से हाई कोर्ट, सुप्रीमकोर्ट तथा चुनाव आयोग में लड़ता रहा है। 2010 में जब इलाहबाद हाई कोर्ट ने आदिवासियों को पंचायत राज में आरक्षण देने का आदेश दिया तो मायावती सरकार ने सुप्रीमकोर्ट से स्थगन आदेश प्राप्त कर लिया और आदिवासियों को पंचायती राज में आरक्षण नहीं मिल सका। इतना ही नहीं बसपा, सपा, भाजपा तथा कांग्रेस आदिवासियों के विधानसभा तथा लोकसभा में आरक्षण का हाइकोर्ट एवं सुप्रीम कोर्ट म लगातार विरोध करती आई हैं। 2010 में इलाहबाद हाई कोर्ट ने जब आदिवासियों के लिए दो विधानसभा सीटें आरक्षित करने का आदेश दिया तो सभी राजनीतिक पार्टियों ने इसका विरोध किया। केंद्र की कांग्रेस सरकार भी इसको रखी रही और खानापूर्ति के लिए 2013 में ऑर्डिनेन्स जारी करके बैठ गयी परंतु लोकसभा में आरक्षण बिल पास नहीं कराया। 2014 में जब भाजपा सरकार आयी तो उसने इस बिल को पास कराने की बजाए इसे वापस ले लिया और आदिवासियों को मिलने वाले प्रतिनिधित्व के अधिकार का गला घोंट दिया। इस पर आइपीएफ ने 2014 में जंतर मंतर पर धरना दिया जिसमें आइपीएफ के राष्ट्रीय संतोजक, अखिलेन्द्र प्रताप सिंह ने 10 दिन का अनशन भी रखा। इसी बीच राष्ट्रीय अभियान के राष्ट्रीय संयोजक प्रशांत भूषण के माध्यम से राष्ट्रीय चुनाव आयोग को पिटीशन भी दी गयी।
चुनाव आयोग ने जब 4 फरवरी , 2014 को दुद्धी और ओबरा की दो विधान सभा सीटें आदिवासियों के लिए आरक्षित करने का आदेश दिया तो इस पर बसपा, सपा, भाजपा और कांग्रेस एकजुट होकर हाइकोर्ट में विरोध करने के लिए पहुँच गयीं। आइपीएफ द्वारा मज़बूत पैरवी के कारण ही हाइकोर्ट ने इन पार्टियों के विरोध को निरस्त करके इन सीटों को आदिवासियों के लिए आरक्षित करने के आदेश को बरकरार रखा है। आदिवासी इतिहास में यह पहला अवसर है जब आइपीएफ के लंबे संघर्ष के फलस्वरूप आदिवासियों को जनप्रतिनिधित्व का लोकतान्त्रिक अधिकार मिल सका है। आदिवासी आइपीएफ के इस संघर्ष को बहुत अच्छी तरह से जानते हैं और चुनाव में सपा, बसपा, भाजपा और कांग्रेस को वोट नहीं देंगे।
3. उत्तर प्रदेश का सोनभद्र क्षेत्र पत्थर, बालू और कोयले का घर है। परंतु इस क्षेत्र में सरकारी सहमति से अंधाधुंध अवैध खनन हुआ है। इस खनन में मुख्य मंत्री स्तर पर भ्रष्टाचार / लूट हुयी है जिसे इस क्षेत्र में वीआईपी टैक्स के नाम से जाना जाता है। यह बालू तथा पत्थर के यातायात में सरकारी स्तर पर अवैध वसूली के रूप में होती रही है। इसके अंतर्गत 1100 रुपये का रवन्ना ब्लैक में 3000 से 5000 रूपये में बेचा जाता रहा है। वैसे तो वीआईपी टैक्स वसूली का धंधा राजनाथ सिंह की सरकार के समय से शुरू हुआ था जो भाजपा सरकार के भ्रष्टाचार मुक्त होने का दावा कर रहे हैं। मायावती सरकार के दौरान इसकी वसूली मायावती का बहुत नज़दीकी खनिज मंत्री बाबू सिंह कुशवाहा करके मायावती को पहुंचाता रहा। सपा सरकार में यह जुम्मेदारी अखिलेश के खनिज मंत्री गायत्री प्रजापति जो मुलायम सिंह के दत्तक पुत्र हैं,  को दी गयी थी जो अब बलात्कार के आरोप में फरार है। राजनैतिक माफियाओं की इस वीआईपी लूट को इस जिले का बच्चा बच्चा जानता है। आइपीएफ ने वीआईपी लूट के राजनीतिक माफियाओं को सजा देने का नारा दिया है जिसे भारी जनसमर्थन मिल रहा है।
4. सोनभद्र का आदिवासी क्षेत्र उत्तर प्रदेश का कालाहांडी है। इस क्षेत्र में बुनियादी सुविधायों शिक्षा, स्वास्थ्य, सुरक्षित पेयजल, सिंचाई, बिजली तथा यातायात के साधनों का घोर अभाव है। इसके फलस्वरूप इस क्षेत्र में हर साल हज़ारों औरतें, मर्द तथा बच्चे मौत का शिकार होते हैं। आदिवासी चुआड़ तथा नदी नालों का गंदा पानी पी कर बीमार होते हैं। इस क्षेत्र के विकास के लिए जो भी पैसा आता है उसे राजनेता, ठेकेदार तथा अधिकारी मिल कर बाँट लेते हैं। इस क्षेत्र की इस दुर्दशा को लेकर आदिवासियों में सभी राजनीतिक पार्टियों के विरुद्ध आक्रोश व्याप्त है। इसी लिए उन्होंने इस चुनाव में अपने पिछड़ेपन के लिए ज़िम्मेदार पार्टियों को सबक सिखाने का फैसला लिया है।

कोई टिप्पणी नहीं:

एक टिप्पणी भेजें

Petition · Punish the offenders for burning Indian Constitution · Change.org

Petition · Punish the offenders for burning Indian Constitution · Change.org