गुरुवार, 2 जुलाई 2026

भक्ति आन्दोलन से दलितों का उद्धार क्यों नहीं हुआ?

 

भक्ति आन्दोलन से दलितों का उद्धार क्यों नहीं हुआ?

- डॉ आंबेडकर

"संतों के संघर्ष का समाज पर कोई प्रभाव नहीं पड़ा. उन्होंने कुछ धूल तो उड़ाई परन्तु वे लोगों के स्तर को ऊँचा नहीं उठा सके. उन्होंने ईश्वर के सम्मुख समानता की लड़ाई तो लड़ी परन्तु समाज में समानता की नहीं.

"मनुष्य की गरिमा स्वत सिद्ध एवं स्व प्रमाणित है और वह उस पर भक्ति का मुलम्मा चढ़ाने से नहीं आती है. संतों ने इस तथ्य को स्थापित करने का संघर्ष नहीं किया. इस के विपरीत उन के संघर्ष का दलितों पर बहुत बुरा प्रभाव पड़ा. इस से ब्राह्मणों को उन्हें चुप कराने का यह बहाना मिल गया कि आप का भी सम्मान होगा जब आप चोखामेला का दर्जा प्राप्त कर लेंगे."

चूंकि भक्ति के विभिन्न पंथों के अनुयायी स्वयं जातिगत पूर्वाग्रहों से भरे हुए थे, इसलिए डॉ. अंबेडकर आगे बढ़े, उन्होंने केवल समानता, न्याय और मानवतावाद के उनके संदेश से आंखें मूंद लीं, बल्कि उनके अविश्वसनीय चमत्कारों का अत्यधिक अतिशयोक्ति के साथ वर्णन भी किया।– “Dr. Ambedkar, Life and Mission”: Dhananjay Keer, p. 109-110

भक्ति आन्दोलन से दलितों का उद्धार क्यों नहीं हुआ?

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